Irshad-Kamil170709_0733

August 15, 2009

ગીતકાર ઇર્શાદ કામિલ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

આ બ્લોગ ગમ્યો? ફેસબુક મિત્રો સાથે શૅર કરો!

શે’ર બજાર

दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो
तो ज़िन्दा हो तुम
नज़र में ख्वाबों की बिजलियाँ लेके चल रहे हो
तो ज़िन्दा हो तुम
हवा के झोंको के जैसे आझाद रहना सीखो
तुम एक दरिया के जैसे लेहेरों में बेहना सीखो
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समा देखे ये निगाहें
जो अपनी आँखों में हैरानियाँ लेके चल रहे हो तुम
तो ज़िन्दा हो तुम
-जावेद अख्तर
(झिंदगी मिलेगी ना दोबारा)

સૌરભ શાહ સાથે ફેસબુક પર જોડાઓ!

Powered By Indic IME