दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो
तो ज़िन्दा हो तुम
नज़र में ख्वाबों की बिजलियाँ लेके चल रहे हो
तो ज़िन्दा हो तुम
हवा के झोंको के जैसे आझाद रहना सीखो
तुम एक दरिया के जैसे लेहेरों में बेहना सीखो
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समा देखे ये निगाहें
जो अपनी आँखों में हैरानियाँ लेके चल रहे हो तुम
तो ज़िन्दा हो तुम
-जावेद अख्तर (झिंदगी मिलेगी ना दोबारा)
“Truth is ever to be found in the simplicity, and not in the multiplicity and confusion of things.”
— Isaac Newton
“It is very often nothing but our own vanity that deceives us.”
— Jane Austen